आरोग्य के आदिदेव भगवान धन्वंतरि: समुद्र मंथन से औषधीय ज्ञान तक और दवा व्यवसाय जगत में उनका सिरमौर स्थान
विशेष रिपोर्ट (नेशनल ब्यूरो)| PharmaGaze 24
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस): सनातन संस्कृति में 'आरोग्य' को ही जीवन का सबसे बड़ा धन माना गया है। इसी आरोग्य के संवाहक, समस्त सृष्टि के प्रथम चिकित्सक और भगवान विष्णु के 12वें अंशावतार आरोग्य देव आदिदेव भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य दिवस (धन्वंतरि जयंती) पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
समुद्र मंथन से हुआ प्राकट्य: दिव्य स्वरूप और अमृत कलश की कथा
पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब देवों और दानवों द्वारा क्षीर सागर का मंथन किया जा रहा था, तब कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए।
- दिव्य रूप: भगवान धन्वंतरि के एक हाथ में संजीवन शक्ति से परिपूर्ण अमृत कलश, दूसरे में आयुर्वेद शास्त्र/औषधि, तीसरे में शंख और चौथे में चक्र सुशोभित था।
- आयुर्वेद का प्रादुर्भाव: सृष्टि को रोगमुक्त करने और मानव कल्याण के लिए उन्होंने संसार को 'आयुर्वेद' जैसा दिव्य चिकित्सा विज्ञान दिया। उन्होंने ही संसार की वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों की खोज की और शल्य चिकित्सा (सर्जरी) व औषधि विज्ञान की नींव रखी।
दवा व्यवसाय और फार्मा इंडस्ट्री के सर्वमान्य देव 'भगवान धन्वंतरि'
आज का आधुनिक फार्मास्यूटिकल सेक्टर (दवा व्यवसाय) भले ही आधुनिक तकनीक और शोध पर टिका हो, लेकिन इसकी आत्मा और मूल चेतना भगवान धन्वंतरि के ही सिद्धांतों से प्रेरित है। दवा व्यवसाय जगत में उनका स्थान अत्यंत सर्वोच्च और प्रेरणादायी है:
- सेवा और आरोग्यता के प्रतीक: दवा व्यवसाय केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य और जीवन रक्षा का पावन माध्यम है। दवा विक्रेता (केमिस्ट), फार्मासिस्ट, निर्माता और शोधकर्ता भगवान धन्वंतरि को अपना ईष्ट देव और मार्गदर्शक मानते हैं।
- अमृत रूपी औषधियों का वितरण: जिस प्रकार भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर आए थे, उसी प्रकार आज दवा व्यवसाय से जुड़े लोग रोगियों तक जीवनरक्षक औषधियाँ पहुँचाकर भगवान धन्वंतरि के 'आरोग्य दूत' का दायित्व निभाते हैं।
- फार्मेसी और वैद्यों का सिरमौर स्थान: वैद्य परंपरा से लेकर आधुनिक केमिस्ट और फार्मास्यूटिकल कंपनियों तक, सभी धन्वंतरि जयंती के दिन अपने प्रतिष्ठानों में भगवान धन्वंतरि का पूजन कर यह संकल्प लेते हैं कि समाज को शुद्ध, गुणवत्तापूर्ण और जीवनरक्षक दवाएँ सुलभ कराई जाएँ।
'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः' का संदेश
धन्वंतरि जयंती केवल पूजन का दिन नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का अवसर है कि भौतिक धन-समृद्धि से भी ऊपर 'स्वास्थ्य धन' है। फार्मागेज 24 (PharmaGaze 24) की ओर से समस्त देशवासियों, चिकित्सकों, दवा विक्रेताओं और फार्मा जगत के सभी सहयोगियों को धन्वंतरि जयंती एवं धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
भगवान धन्वंतरि आप सभी को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि प्रदान करें।
